My first ever Hindi poem

तेरे आखोंने मुझसे जो वादा किया था,

वो तेरे ज़ुबाँने क्यूँ तोड दिया?

इस दिलकी सच्चे महोब्बत को

तूने यूँही झुटलादिया.

तेरे दिल ने मुझसे जो इकरार किया था,
उसेे तू क्यूँ मुकर गया,

ऐसे करते करते इस वफा को बेवफा कर गया,

तेरे धडकन ने मुझसे जो बात कहीं वो तू कैसे भूल गया?

हमदर्द को दर्द देके खुद बेदर्द क्यूँ हो गया?

प्यार ने प्यार से जो इकरार किया उससे भी ठुकरा दिया,

इस तरह मुँह मोडके तूने अपने को पराया बना दिया.

Copyright 2018 Chitkala Mulye ( Chitkala Aditosh)

76 thoughts on “My first ever Hindi poem

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